क्या नाम से फर्क पड़ सकता है? - देव आनंद

Image
क्या नाम से फर्क पड़ सकता है? की श्रृंखला में आपका स्वागत है नाम के अक्षर विभिन्न तत्वों के सदस्य हैं जैसे जल मण्डल , अग्नि मण्डल , पृथ्वी मण्डल  और वायु मण्डल । देव आनंद बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी एक सफल अभिनेता और कलाकार थे। आज मैं उनके फिल्मी नाम देव और असली नाम धरमदेव दोनों का विश्लेषण करूंगा और जानूंगा कि उनके सफल करियर में उनके नाम का कोई योगदान है या नहीं। नाम देव  आनंद   -  देव शब्द में एक अक्षर वायु मण्डल से और एक अक्षर अग्नि मण्डल से। दोनों तत्व एक दूसरे के मित्र हैं अर्थात एक दूसरे की टांग नहीं खींचते और एक दूसरे की मदद करते हैं जिससे 1 + 1 = 11 हो जाता है। उपनाम आनंद - 1 अक्षर जल मंडल, 2 अक्षर वायु मंडल। अब वायु मंडल के कुल अक्षर 3 हुए (१ देव शब्द से और २ आनंद शब्द से) + अग्नि मंडल अक्षर 1 ( देव शब्द से )  =  कुल  मित्र अक्षर 4 और जल मंडल अक्षर 1 (आनंद शब्द से). अगर विरोधी समाज अनुपात 1 विभाजित 4 = 0.25 जो 0.33 जितना या उससे  कम है तो अल्पमत हार मान लेता है और विपरीत पक्ष का मित्र बन जाता है। अतः देव आनंद नाम के 5 अक्षर सही हैं। नाम धरमदेव  आनंद    -  धरमदेव शब्द  इस नाम में

नाम से फरक पड़ता है - मंत्र व्याकरण शाश्त्र - संस्कृत अक्षर

 दोस्तों, विलियम सेक्सपीर ने एक बार कहा था, गुलाब को किसी भी नाम से बुलाइये, क्या फरक पड़ता है? आज मई आप लोगो को यही समझाने वाला हूँ के नाम से फरक पड़ता है. हमारे भारत देश में जन्म के समय के ग्रहो और नक्षत्रो के हिसाब से हर राशि के लिए कुछ अक्षरों को बताया गया है. साधारणतः सभी के नाम उन अक्षरों से सुरु होते है. जैसे की अगर आप की सिंह राशि है तो आप का नाम म या ट अक्षर से शुरू होता होगा जैसे की मनोज वगैरा. लेकिन क्या आप जानते है की सिर्फ पहला अक्षर राशि के हिसाब से रखना काफी नहीं है. आप के नाम के बाकि अक्षरों को भी देखना पड़ता है.

दोस्तों संस्कृत भारत देश की एक प्राचीन भाषा है जो की देवनागरी लिपि में है. संस्कृ भाषा में कूल मिला के ४९ अक्षर है जिसमे से १६ अक्षर स्वर है जिसे की अंग्रेजी में वॉवेल्स कहा जाता है और ३३ अक्षर व्यंजन है  जिसे की अंग्रेजी में कॉन्सोनेंट्स कहा जाता है. जब हमारा नाम रखा जाता है तो वोह इन्ही ४९ अक्षरों मेंसे कुछ अक्षरों को चुनकर रखा जाता है. जैसे की संजय नाम में स ज और य अक्षरों को चुन कर रखा गया है. 

मित्रो, मंत्र व्याकरण शाश्त्र भारत की प्राचीन विद्या है जिसका उपयोग संस्कृत के मंत्रो को ठीक से बनाने के लिए किया जाता है. इस विद्या में कोनसे मंत्र में संस्कृत के कोनसे अक्षर या शब्द शामिल करने है और कौनसे नहीं इसके बारे में बताया गया है.  मंत्र व्याकरण शाश्त्र के हिसाब से संस्कृत भाषा के सारे ४९ अक्षर अपने आप में मंत्र है और इन अक्षरों का चुनाव सोच समाज के करना चाहिए.

मंत्र व्याकरण शाश्त्र में इन अक्षरों को ३ तरह के विकल्पों से बाटा गया है. 

पहला विकल्प है वर्ग के हिसाब से जिसमे ८ वर्ग बनाये गए है. जैसे की सारे स्वर एक वर्ग में और बाकी के सारे व्यंजन बाकी ७ वर्गों में. 

दूसरा विकल्प है मंडल के हिसाब से  जिसमे ५ mandalआकाश, वायु, अग्नि, पृथ्वी और जल मंडल का समावेश होता है और इन ४९ अक्षरों को अलग अलग मंडलो में बताया गया है.  दोस्तों यह जाना जरुरी है की पृथ्वी और जल मित्र तत्त्व है तथा अग्नि और वायु मिंत्रा तत्त्व है लेकिन पृथ्वी और जल की अग्नि और वायु से विर्रुध प्रकृति है यानी उनकी नहीं बनती. अगर कुछ अक्षर जो विरोधी मंडल के हो और वोह किसी व्यक्ति के नाम में मिल जाये तो उस व्यक्ति को कुछ परेशानियों का सामना हो सकता है. 

तीसरा विकल्प कक्षा के हिसाब से है जिसमे इन ४९ अक्षरों को ४ कक्षा में बाटा गया है जिससे की पता चले की किस अक्षर वाला व्यक्ति किस क्षेत्र में आगे बढ़ेगा? जैसे की कक्षा १ के स्कॉलर्स, उच्चा शिक्षा, धार्मिक/आध्यात्मिक, कला वगैरा, कक्षा २ में नेतृत्व,बहादुरी, खेल वगैरा, कक्षा ३ में बिज़नेस और कक्षा ४ में नौकरी.

Disclaimer - यह विषय आस्था या विश्वास का है। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि इस सेवा का उपयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अपना वांछित परिणाम मिलेगा।

Popular posts from this blog

World Markets ranking based on their distance from 52 Weeks High

US Markets country wise distribution of Market Capitalization as on week starting July-17-2023

Why Investors should track US Bond Yields? Update as on July 24, 2023